गिरावट को सही तरह पढ़ना
गिरावट पिछले शिखर से सबसे गहरा उतार है। उसे ग़लत शृंखला पर निकालना इस तरह के औज़ारों की सबसे आम भूल है।
खाते के मूल्य का जाल
अगर कोई व्यापारी अपनी आधी रक़म निकाल ले, तो खाते का मूल्य आधा हो जाता है। सीधे-सीधे निकालने पर वह 50 % की गिरावट पढ़ी जाती है — एक भयानक नुक़सान जो कभी हुआ ही नहीं।
यहाँ गिरावट संचयी लाभ पर निकाली जाती है, जिस पर जमा और निकासी का असर नहीं पड़ता। बहीखाता उपलब्ध हो तो हम संपत्ति-वक्र को भी लेन-देन के हिसाब से सुधार लेते हैं।
गहराई, और उबरने का समय
20 % की समान अधिकतम गिरावट वाले दो व्यापारी तुलनीय नहीं हैं अगर एक छह दिन में उबर आया और दूसरे को चार महीने लगे। कोई रणनीति झेली जा सकती है या नहीं, यह उबरने का समय ही तय करता है।
प्रतिशत को किसकी ज़रूरत है
गिरावट के प्रतिशत को पूँजी का आधार चाहिए। हम आरंभिक पूँजी का अनुमान खिड़की के शुरू में खाते के मूल्य से लगाते हैं, शुद्ध जमा-निकासी से सुधारकर। बहीखाता न मिले तो हम डॉलर का आँकड़ा छापते हैं और प्रतिशत को अनुपलब्ध बताते हैं, कोई हर गढ़ नहीं लेते।